भदोही जनपद (उ0प्र0) जनांककीय संरचना का एक प्रतीक अध्ययन
डाॅ0 उमेश कुमार मिश्र
प्रवक्ता, भूगोल गोपीनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय देवली, सलामतपुर गाजीपुर.
*Corresponding Author E-mail: umeshmishra7843@gmail.com
ABSTRACT:
मानव का ज्ञान ही सर्वप्रमुख संसाधन है। क्योंकि उसके सामाजिक सांस्कृतिक, राजनैतिक संगठन के कारण तत्व संसाधन का रूप ग्रहण करते हैं अतः मानव स्वयं संसाधन एवं संसाधनकर्ता भी है किसी भी क्षेत्र में जनसंख्या महत्वपूर्ण संसाधन है तथा वह संसाधनों का प्रेरणास्रोत भी होता है। किसी भी प्रदेश के जनांककीय विशेषता उस प्रदेश के भौतिक वातावरण के तत्वों और संसाधनों के सम्मिलित भूमिका का परिणाम होती है। इस बात की अति आवश्यक है कि यहाॅ पर तीव्र जनसंख्या वृद्धि को परिवार नियोजन कार्यक्रम के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त स्त्री शिक्षा का प्रचार प्रसार हो, जनसंख्या वृद्धि से होने वाली समस्याओं से नुक्कड़ नाटक के माध्यम से अवगत कराया जाए।
KEYWORDS: जनसंख्या वितरण, जनसंख्या घनत्व, जनसंख्या वृद्धि।
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भदोही जनपद के गठन की घोषणा 01 सितम्बर सन् 1993 में हुई, जिसका मूर्त रूप 30 जून 1994 में वाराणसी से अलग होकर एक नवसृजित स्वतंत्र जनपद के रूप में अस्तित्व में आया। उत्तर भारत के मध्य गंगा के मैदानी क्षेत्र में भदोही जनपद का अक्षांशीय विस्तार 25010’ उत्तरी अक्षांश से 250 32’15’’ अक्षांश तथा 820 12’ 24’’ पूर्वी देशान्तर से 82042’ 28’’ पूर्वी देशान्तर के मध्य में स्थित है। भदोही जनपद का विस्तार उत्तर से दक्षिण 41.16 कि0मी0 एवं पूरब से पश्चिम अधिकतम विस्तार 49.49 कि0मी0 है। यह जनपद प्रदेश (उत्तर प्रदेश) मुख्यालय से लगभग 326 कि0मी0 दक्षिण-पूर्व, वाराणसी से 60 कि0मी0 पश्चिम, इलाहाबाद से 64 कि0मी0 पूर्व, जौनपुर से 53 कि0मी0 दक्षिण एवं मिर्जापुर से 38 कि0मी0 उत्तर दिशा में अवस्थित है। इस जनपद का सम्पूर्ण भौगोलिक क्षेत्रफल 1056 वर्ग कि0मी0 था। जिसमें सात विकासखण्ड (भदोही, सुरियावाॅ, ज्ञानपुर, औराई, डीघ, रामपुर व बरसठी) थे। जिसमें से रामपुर और बरसठी विकासखण्ड़ को जनपद जौनपुर में सन् 1997 में मिला दिया गया।
वर्तमान समय में इसका कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 1015 वर्ग कि0मी0 है, जो उत्तर प्रदेश के 0.44 प्रतिशत क्षेत्र को अपने में समाहित करता है। प्रशासनिक दृष्टि से मिर्जापुर मण्डल के इस जनपद में तीन तहसीलें - ज्ञानपुर, औराई व भदोही एवं 6 विकासखण्ड़ों - ज्ञानपुर, औराई, भदोही, सुरियावाॅ, डीघ और अभोली है। जिसमें ज्ञानपुर तहसील के अन्तर्गत ज्ञानपुर एवं डीघ विकासखण्ड, भदोही तहसील के अन्तर्गत - भदोही, सुरियावाॅ एवं अभोली विकासखण्ड एवं औराई तहसील के अन्तर्गत-औराई विकासखण्ड आते हैं। सन् 2011 की जनगणना के अनुसार जनसंख्या 1578213 है और जनघनत्व 1555 प्रति व्यक्ति वर्ग कि0मी0 है। जिसमें 1348911 ग्रामीण एवं 229302 नगरीय जनसंख्या है। जो प्रदेश की जनसंख्या का 0.79 प्रतिशत भाग है। जनपद में 1224 गाॅवों (1087 आबाद गाॅवों व 137 गैर आबाद गाॅव) में विभक्त है। जनपद में कुल सात नगरीय क्षेत्र - भदोही, नई बाजार, ज्ञानपुर, गोपीगंज, सुरियावाॅ, खमरियाॅ व घोसिया बाजार है और 79 न्याय पंचायते स्थित है। जनपद का मुख्यालय ज्ञानपुर में स्थित है।
अध्ययन का उद्देश्य:-
1. क्षेत्र की जनसंख्या घनत्व को प्रस्तुत करना।
2. विभिन्न दशकीय जनसंख्या वृद्धि की व्याख्या करना।
3. जनसंख्या वृद्धि से विभिन्न समस्याओं को जन-जन तक पहुॅचाना।
4. स्त्रियों की शिक्षा उच्च एवं तकनीकि पूर्ण हो।
5. जनसंख्या वृद्धि से पर्यावरणीय दशाओं पर प्रभाव
आॅकड़ो का स्वरूप:-
इस शोध पत्र में विकासखण्डो को इकाई मानकर किया गया है। जिसमें भदौहीं जनपद के पाॅच विकासखण्डों के आकड़े द्वितीयक रूप से संग्रहित किये गयें हैं। आंकड़ो के एकत्रीकरण हेतु आधार वर्ष 1991 से 2011 को लिया गया है। द्वितीयक आंकड़ो की प्राप्ति जनपद जनगणना हस्त पुस्तिका, सांख्यिकीय पुस्तिका तथा गजेटियर से है। सांख्यिकीय विधियों का प्रयोग करके आंकड़ो का विश्लेषण किया गया।
शोध प्राविधि:-
भूगोल में जनांकिकी संरचना का अध्ययन एक महत्वपूर्ण पक्ष है। जिसके अन्तर्गत जनांकिकीय गुण यथा जनसंख्या वृद्धि, जनसंख्या विवरण, जनसंख्या घनत्व, आयु, लिंगानुपात, साक्षरता, भाषा, धर्म आदि के अध्ययन सम्मिलित है। मानव का ज्ञान ही सर्वप्रमुख संसाधन है क्योंकि उसके सामाजिक, सांस्कृतिक व राजनीतिक संगठन के कारण तत्व संसाधन का रूप ग्रहण करते हैं। अतः मानव स्वयं संसाधन एवं संसाधनकर्ता भी है। किसी भी क्षेत्र में जनसंख्या एक महत्वपूर्ण संसाधन है तथा वह संसाधनों का प्रेरणा स्रोत भी होता है। जनसंख्या के अभाव में प्राकृतिक पर्यावरण के सभी संसाधन अनुपयोगी सिद्ध होते जाते हैं। जनसंख्या का आर्थिक, सामाजिक-सांस्कृतिक और राजनैतिक दृष्टि से अपना विशेष महत्व होता है। किसी प्रदेश की जनांकिकीय विशेषता उस प्रदेश के भौतिक वातावरण के तत्वों और संसाधनों की सम्मिलित भूमिका का परिणाम होती है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद सामाजिक और राजनैतिक परिस्थितियों में स्थायीत्व प्राप्त हुआ है और व्यवसायिक, प्रशासनिक, औद्योगिक, यातायात और औद्योगिक केन्द्रों का स्थानीकरण होने से ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में सुधार हुआ है। क्षेत्र विशेष की सामाजिक आकारिकी को समझने के लिये जनसंख्या का बहुआयामी अध्ययन आवश्यक है। सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भदोही जनपद की कुल जनसंख्या 1578213 है जिसमें पुरूष 51.14 प्रतिशत और महिलाओं का प्रतिशत 48.86 है। सन् 2001 से 2011 के दशक में कुल 32.2 प्रतिशत जनसंख्या की वृद्धि पायी गई है। जनपद में (2011) जनसंख्या का औसत घनत्व 1555 व्यक्ति प्रति वर्ग कि0मी0 तथा लिंगानुपात 955 प्रति हजार पुरूषों में है जो प्रदेश (908) के औसत से अधिक है। साक्षरता का प्रतिशत 69 है।
जनसंख्या विकास -
अध्ययन क्षेत्र मध्य गंगा बेसिन के समतल मैदानी भाग में स्थित है। जहाँ स्वास्थ्यवर्द्धक जलवायु, जल की उपलब्धता, उर्वरक भूमि, परिवहन तंत्र एवं विकसित संचार साधन के कारण जनसंख्या का समूहन हो गया है। भदोही जनपदकी जनसंख्या 1961 में 454317 थी। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् देश में सामाजिक-सांस्कृतिक एवं आर्थिक विकास हेतु नियोजन प्रारंभ हुआ, जिसके परिणामस्वरूप कृषि उत्पादन में सुधार व स्वास्थ्य सेवाओं का विकास हुआ। खाद्यानों की उपलब्धता, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार से मृत्युदर घटी है लेकिन जन्मदर पर नियंत्रण न हो पाने के कारण यहाँ की जनसंख्या 1971 में बढ़कर 557307 हो गयी, इस प्रकार 1961-71 के दशक में यहाँ की जनसंख्या में कुल 102990 अर्थात 22.7 प्रतिशत वृद्धि अंकित की गई जो प्रादेशिक वृद्धि पर 19.78 प्रतिशत से अधिक थी। सन् 1981 में जनपद की जनसंख्या तीव्र गति से बढ़कर 780014 हो गयी। इस प्रकार 1971-81 के दशक में कुल जनसंख्या में 40.00 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस दशक में तीव्र जनसंख्या वृद्धि का मुख्य कारण औद्योगिक व आर्थिक विकास रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं में प्रसार के फलस्वरूप जन्म दर की तुलना में मृत्यु दर में अत्यधिक नियंत्रण ने तीव्र जनसंख्या वृद्धि को प्रोत्साहित किया। 1991 में जनपद की जनसंख्या बढ़कर 1073633 हो गयी। इस प्रकार 1981-91 के दशक में जनसंख्या वृद्धि 127619 तथा दशकीय वृद्धि 38.15 प्रतिशत थी। पिछले दशक की अपेक्षा, अध्ययन क्षेत्र में, इस में वृद्धि दर कम रही। विभिन्न प्रकार के परिवार नियोजन कार्यक्रमों व शिक्षा का प्रभाव जन्मदर के नियंत्रण पर परिलक्षित होने लगा और इसी कारण से पूर्ववर्ती दशक की तुलना में इस दशक मंे यहाँ सापेक्षिक अनुपात में कम वृद्धि अंकित की गयी। सन् 2001 में जनपद की जनसंख्या 1353705 हो गयी 1991-2001 के दशक में यहाँ निरपेक्ष जनसंख्या वृद्धि 276072 तथा प्रतिशत वृद्धि 25.62 अंकित की गयी। इस समयावधि में प्रदेश (25.8 प्रतिशत) में वृद्धि दर जनपद की तुलना में अधिक थी। सन् 2001-2011 के दशक में यहाँ निरपेक्ष जनसंख्या वृद्धि 224508 तथा प्रतिशत वृद्धि 16.58 अंकित की गयी। जो तालिका संख्या 1.5 में उल्लेखित है। अतः पिछले दशकों की तुलना में जनपद की जनसंख्या में सबसे कम वृद्धि हुई है। इस दशक में औद्योगिक कृषि व आर्थिक विकास, स्वास्थ्य सेवाओं के प्रसार के फलस्वरूप जन्मदर की तुलना में मृत्युदर पर नियंत्रण ने जनसंख्या नियंत्रण को प्रोत्साहित किया है।
जनसंख्या का वितरण -
किसी भी क्षेत्र विशेष की जनसंख्या स्वरूप अपने अन्दर अतीत की अनगिनत ऐतिहासिक गतिविधियों का सम्मिलित प्रभाव वर्तमान की समकालीन चुनौतियों एवं भविष्य की सम्भावनाओं को सम्मिलित किये होता है। मानव निवास के लिये अनुकूल या आदर्शतम जलवायुवीय और पर्यावरणीय दशाओं का निर्धारण करना एक दुष्कर कार्य है। साथ ही मानव एक सक्रिय कारक है जो पसन्दानुसार अपने रहने का स्थान भी चुनता है और उस चयनित स्थान में अपनी आवश्यकतानुसार परिवर्तन भी करता है। जनसंख्या वितरण का भौगोलिक स्वरूप अनगिनत सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विस्तार का समन्वित प्रतिरूप प्रदर्शित करता है। सामाजिक गत्यात्मकता एवं संसाधनों का अन्यान्याश्रित संबंध विभिन्न ऐतिहासिक बिन्दुओं पर मानवीय पक्षों को प्रभावित करता ळें वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार भदोही जनपद की कुल जनसंख्या 1578213 है। सन् 2011 की जनगणना वितरण अवलोकन से यह ज्ञात होता है कि सर्वाधिक जनसंख्या विकासखण्ड औराई 13.85 प्रतिशत (313365) है क्योंकि इस विकासखण्ड में प्रवास की मात्रा कम हुई है और सबसे कम जनसंख्या विकासखण्ड अभोली में 7.99 प्रतिशत (126076) है क्योंकि इस विकासखण्ड से प्रवास भी अधिक हुई है अन्य विकासखण्डों- भदोही विकासखण्ड में 18.35 प्रतिशत (289868), डीघ विकासखण्ड में 16.54 प्रतिशत (261151), ज्ञानपुर विकासखण्ड में 16.53 प्रतिशत (261151) व सुरियावाॅ विकासखण्ड में 9.01 प्रतिशत (142218) जनसंख्या निवास करती है। जनसंख्या का सन् 2001-2011 तक विकासखण्डवार अध्ययन करने पर यह ज्ञात होता है कि सन् 2001 की तुलना में 2011 में 14.23 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। सन् 2011 में न्यूनतम जनसंख्या वृद्धि अभोली विकासखण्ड में 7.99 प्रतिशत तथा सुरियावाॅ में 9.21 प्रतिशत है और सबसे अधिक वृद्धि औराई विकासखण्ड में 19.85 प्रतिशत है। जो तालिका संख्या 1 और आरेख संख्या 1 से स्पष्ट है।
स्रोत - जनपद सांख्यिकीय पुस्तिका, भदोही
आरेख सं. - 1 भदोही जनपद में जनसंख्या का वितरण (सन् 2001-2011)
जनपद में जनसंख्या वितरण के उपयुक्त तथ्यों के अवलोकन में अध्ययन क्षेत्र को तीन श्रेणियों में रखा गया है -
1. सघन जनसंख्या बसाव का क्षेत्र -
इस श्रेणी के अन्तर्गत जनपद के दो विकासखण्ड ज्ञानपुर और औराई सम्मिलित है। इस क्षेत्र में कुल चार नगरीय क्षेत्र ज्ञानपुर, गोपीगंज, घोसियाँ बाजार एवं खमरिया अवस्थित है। दोनों ही विकासखण्ड में 2001 से 2011 में जनसंख्या में तीव्र वृद्धि हुई है।
2. मध्ययम जनसंख्या बसाव का क्षेत्र -
इसके अन्तर्गत दो विकासखण्ड भदोही और सुरियावाॅ आते हैं। इस क्षेत्र में कुल तीन नगरीय क्षेत्र भदोही, नई बाजार एवं सुरियावाॅ आते हैं। भदोही जनपद का मुख्य नगर है। इसलिये इस क्षेत्र में जनसंख्या का अधिक होना स्वभाविक है वरन् ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंख्या का वितरण क्षेत्रफल के अनुपात में कम है।
3. विरल जनसंख्या बसाव का क्षेत्र -
इस श्रेणी के अन्तर्गत अभोली, डीघ विकासखण्ड सम्मिलित है। इन विकासखण्डों मंें सम्पूर्ण जनसंख्या ग्रामीण है और यहाँ कोई नगर नहीं है। जो तालिका संख्या 1.1 से स्पष्ट है-
स्रोत - जनपद सांख्यिकीय पुस्तिका, भदोही
ऽ जनसंख्या का घनत्व -
जनसंख्या का घनत्व की संकल्पना, मनुष्य के क्षेत्रीय वितरण को स्पष्ट करने का महत्वपूर्ण उपकरण है। (क्लार्क 1972) वास्तव में जनसंख्या का वितरण एवं घनत्व एक दूसरे से संबंधित होतेे हैं। जनसंख्या का घनत्व किसी क्षेत्र की वर्तमान स्थिति तथा भावी प्रगति का अध्ययन करने में सहायक होता है। किसी क्षेत्र में संसाधन की मात्रा सीमित होती है। भूमि, क्षेत्रफल, मिट्टी, वन, खनिज एवं जल संसाधन आदि की एक निश्चित मात्रा होती है। जिसका उपयोग क्षेत्र की जनसंख्या अपने निर्वाह हेतु करती है। जनसंख्या भार के मापन की विधियों जैसे - गणितीय घनत्व, कृषि घनत्व, कार्यिक घनत्व, आर्थिक घनत्व, तथा पौष्टिक घनत्व का विश्लेषण करना आवश्यक है।
गणितीय घनत्व -
किसी क्षेत्र के कुल क्षेत्रफल और उसकी कुल जनसंख्या का अनुपात अंक गणितीय घनत्व कहते हैं। इसके द्वारा प्रति इकाई क्षेत्रफल (प्रति वर्ग कि0मी0 अथवा प्रतिवर्ग मील) में रहने वाले व्यक्तियों की औसत संख्या का बोध होता है। वास्तव में अंक गणितीय घनत्व को निम्न सूत्र द्वारा ज्ञात किया जाता है -
अध्ययन क्षेत्र में जनसंख्या का गणितीय घनत्व 1554 व्यक्ति/कि0मी02 प्राप्त हुआ है। ग्रामीण गणितीय घनत्व 1374 व्यक्ति/कि0मी02 की अपेक्षा नगरीय गणितीय घनत्व 6786 व्यक्ति/कि0मी02 है, जो लगभग 4.9 गुना अधिक है। सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व औराई विकासखण्ड में 1661 व्यक्ति/कि0मी02 प्राप्त हुआ है क्योंकि इस विकासखण्ड में भूमि की पोषण क्षमता अधिक एवं रूढि़वादी समाज है तथा सबसे कम जनसंख्या घनत्व सुरियावाॅ विकासखण्ड 1221 व्यक्ति/कि0मी02 प्राप्त हुआ है शेष विकासखण्ड का वितरण तालिका सं. 1.2 से स्पष्ट है।
स्रोत - जनपद सांख्यिकीय पुस्तिका, भदोही
ऽ कृषि घनत्व -
किसी भी क्षेत्र के शुद्ध कृषि भूमि एवं कृषि क्षेत्र में संलग्न जनसंख्या के अनुपात को कृषि घनत्व कहते हैं। यहाँ कृषि, जनसंख्या कृषि क्षेत्र में संलग्न जनसंख्या का द्योतक है। कृषि घनत्व को निम्न सूत्र द्वारा ज्ञात करते हैं -
कृषि घनत्व के आधार पर विकासखण्डों को दो भागों में विभक्त किया जा सकता है।
उपर्युक्त सूत्र की सहायता से तालिका संख्या 1.3 में उल्लेखित है-
स्रोत - जनपद सांख्यिकीय पुस्तिका, भदोही
नोट - कृषि योग्य भूमि में - कृषि योग्य बंजर भूमि, वर्तमान परती, अन्य परती, उद्यानों, वृक्षों एवं झाडि़यों का क्षेत्र व बोया गया क्षेत्र व शुद्ध बोया गया क्षेत्र को जोड़ा गया है।
1. उच्च कृषि घनत्व (130 से अधिक) -
इस श्रेणी के अन्तर्गत दो विकासखण्ड अभोली और ज्ञानपुर आते हैं। जिसका कृषि घनत्व क्रमशः 131 व 141 व्यक्ति प्रति वर्ग कि0मी0 है। इस विकासखण्ड को कृषि में संलग्न जनसंख्या अधिक एवं कृषि योग्य भूमि कम क्षेत्रफल में हैं।
2. मध्यम कृषि घनत्व (100-130) -
इस श्रेणी के अन्तर्गत विकासखण्ड, डीघ, औराई, भदोही, सुरियावाॅ आते हैं। इन विकासखण्डों का कृषि घनत्व क्रमशः 128, 115, 108, व 107 है।
ऽ कार्यिक घनत्व -
कार्यिक घनत्व क्षेत्र की कुल जनसंख्या और कृषिगत क्षेत्र के अनुपात को प्रदर्शित करती है। इसको प्रति हेक्टेयर अथवा प्रति वर्ग कि0मी0 कृषित भूमि पर जनसंख्या का भार होता है। यह घनत्व सम्पूर्ण जनसंख्या एवं सम्पूर्ण कृषिगत भूमि के बीच निश्चित समय पर प्रति इकाई सम्बन्ध व्यक्त करता है। जो उस क्षेत्र की वास्तविक आर्थिक स्थिति को प्रस्तुत करता है। कार्यिक घनत्व की गणना में निम्न सूत्र का प्रयोग किया गया है -
स्रोत - जनपद सांख्यिकीय पुस्तिका, भदोही
तालिका संख्या 1.4 की सहायता से 2011 की जनगणना के आधार पर अध्ययन क्षेत्र के कार्यिक घनत्व को दो श्रेणियों में विभक्त किया जा सकता है -
01. उच्च कार्यिक घनत्व (1500 से अधिक)
इसके अन्तर्गत जनपद के तीन विकासखण्ड ज्ञानपुर, औराई और अभोली आते हैं। जिनका कार्यिक घनत्व क्रमशः 1904, 1997 व 1570 व्यक्ति प्रति वर्ग कि0मी0 है। इन विकासखण्डों में कृषि योग्य भूमि कम है और भूमि का अधिकांश भाग कृषियेत्तर कार्यो में लगी है अर्थात अधिकांश जनसंख्या कृषि पर निर्भर नहीं है बल्कि अन्य द्वितीयक, तृतीयक कार्यो में संलग्न है।
02. मध्यम कार्यिक घनत्व (1500-1000) -
इस श्रेणी के अन्तर्गत अध्ययन क्षेत्र के विकासखण्ड डीघ, भदोही, सुरियावाॅ का कार्यिक घनत्व क्रमशः 1458, 1494 और 1414 व्यक्ति प्रति वर्ग कि0मी0 है।
ऽ जनसंख्या वृद्धि -
जनसंख्या वृद्धि किसी निश्चित समय में किसी क्षेत्र/स्थान के जनसंख्या एक समय में घटने पर (नकारात्मक) अथवा एक समय में दो बिन्दुओं के मध्य जनसंख्या वृद्धि (धनात्मक ) होने पर जनसंख्या वृद्धि कहते हैं। किसी स्थान की जनसंख्या वृद्धि वहाॅ की प्राकृतिक, सामाजिक-सांस्कृतिक, आर्थिक व राजनैतिक कारणों द्वारा नियंत्रित होती है। अध्ययन क्षेत्र में जनसंख्या वृद्धि का ज्ञान जनांकिकीय तथ्यों के साथ-साथ जनांकिकीय एवं अजनांकिकीय तत्वों के मध्य अन्तर्निहित संबंधों की जानकारी के लिये आधार प्रस्तुत करता है। इस प्रकार जनसंख्या वृद्धि का विश्लेषण उस क्षेत्र के संपूर्ण विकास के विश्लेषण को समझने का आधार है। अध्ययन क्षेत्र भदोही जनपदएक ऐसा क्षेत्र है जहाँ जनसंख्या अधिक होने के साथ-साथ जनसंख्या वृद्धि दर भी अधिक है जो तालिका सं. 1.5 से स्पष्ट है -
अध्ययन क्षेत्र के इस दशक में (2001-2011) जनसंख्या में सबसे कम वृद्धि हुई है। इस दशक में कृषि, आर्थिक व औद्योगिक विकास तथा स्वास्थ्य सेवाओं के प्रचार-प्रसार के परिणामस्वरूप जन्मदर की तुलना में मृत्युदर पर नियंत्रण में जनसंख्या नियंत्रण को प्रोत्साहित किया है जो तालिका सं. 1.6 में निम्नवत है-
अध्ययन क्षेत्र की वार्षिक जनसंख्या वृद्धि दर सन् 2011 में 16.58 प्रतिशत है। यदि इसी प्रकार की वृद्धि दर बनी रही तो यहाँ की जनसंख्या 2021 में 1776420, 2031 में 1974627 तथा 2041 में 2172788 बढ़कर हो जायेगी। अतः इस बात की अति आवश्यकता है कि यहाँ पर तीव्र जनसंख्या वृद्धि को परिवार नियोजन कार्यक्रमों के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त स्त्री शिक्षा का प्रचार-प्रसार हो, जनसंख्या वृद्धि से होने वाली समस्याओं से नुक्कड़- नाटक के माध्यम से अवगत कराया जाय। यहाँ पर 1951-2011 में मध्य अर्थात 60 वर्षो में जनसंख्या में कुल 1189742 अर्थात 306.26 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
निष्कर्ष
अध्ययन क्षेत्र के इस दशक में (2001-2011) जनसंख्या में सबसे कम वृद्धि हुई है। इस दशक में कृषि, आर्थिक व औद्योगिक विकास तथा स्वास्थ्य सेवाओं के प्रचार-प्रसार के परिणामस्वरूप जन्मदर की तुलना में मृत्युदर पर नियंत्रण में जनसंख्या नियंत्रण को प्रोत्साहित किया है। इस बात की अति आवश्यकता है कि यहाँ पर तीव्र जनसंख्या वृद्धि को परिवार नियोजन कार्यक्रमों के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त स्त्री शिक्षा का प्रचार-प्रसार हो, जनसंख्या वृद्धि से होने वाली समस्याओं से नुक्कड़- नाटक के माध्यम से अवगत कराया जाय।
संदर्भ ग्रंथ -
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5ण् डाॅ0 दूबे कमलाकान्त एवं डाॅ0 सिंह महेन्द्र बहादुर, जनसंख्या भूगोल, रावत पब्लिकेशन्स जयपुर एवं राजस्थान सन् (2001) पृ.स. 76
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7ण् डाॅ0 मौर्य एस0डी0, जनसंख्या भूगोल, शारदा पुस्तक भवन इलाहाबाद, 2009 पृ.स. 196
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Received on 24.08.2021 Modified on 17.09.2021 Accepted on 10.10.2021 © A&V Publications All right reserved Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 2021; 9(3):135-143.
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